
यादों का झरोखा खुला ही था अभी
सर्द हवा ने झझकोर दिया
कुछ यादें ताज़ा हुईं
कुछ ज़ख्म उभर आए
यादों के परिंदों ने उडाने भरीं
वो एक शाख SE दूसरी शाख बैठ आए
जिंदगी की शाम आयी
यादों के परिंदे अपने आशियाने को लौट आए
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